ग्रंथ-संग्रह · होरा
Jātakapārijāta
जातकपारिजात
- रचयिता
- वैद्यनाथ दीक्षित
- काल
- लगभग पंद्रहवीं शती ईस्वी (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- होरा
सार
एक व्यवस्थित परवर्ती संकलन, जो राशि, ग्रह, भाव, योग और दशा पर पूर्व आचार्यों के नियमों को एकत्र करता है। इसका योग-अध्याय और भावेशों का विवेचन प्रायः उद्धृत होते हैं। यह दिखाता है कि उत्तर-मध्यकाल में परंपरा कैसे सुदृढ़ हुई।
संरचना
पद्य में 18 अध्याय (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री (V. Subrahmanya Sastri) का अंग्रेज़ी अनुवाद; संस्कृत-हिंदी संस्करण उपलब्ध हैं।
