ग्रंथ-संग्रह · होरा
Sārāvalī
सारावली
- रचयिता
- कल्याणवर्मा
- काल
- लगभग नौवीं–दसवीं शती ईस्वी (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- होरा
सार
होरा का विशाल संग्रह, जो वराहमिहिर और पूर्ववर्ती यवन सामग्री का विस्तार करता है और ग्रह-स्थितियों तथा योगों के फलों के अनेक विस्तृत वर्णन देता है। कल्याणवर्मा स्वयं कहते हैं कि उन्होंने अनेक पुराने ग्रंथों का सहारा लिया। योगों की व्यापकता के कारण इसे प्रायः देखा जाता है।
संरचना
पद्य में लगभग 54 अध्याय (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
हिंदी टीका सहित संस्कृत संस्करण; आर. संथानम (R. Santhanam) का अंग्रेज़ी अनुवाद।
