ग्रंथ-संग्रह · होरा
Bṛhat Pārāśara Horāśāstra
बृहत्पाराशरहोराशास्त्र
- रचयिता
- ऋषि पराशर को आरोपित
- काल
- संकलित रूप की तिथि अनिश्चित; मुद्रित पाठ को सामान्यतः उत्तर-मध्यकालीन माना जाता है (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- होरा
सार
आधुनिक भारत में होरा का सबसे अधिक प्रयुक्त ग्रंथ, जो पराशर और उनके शिष्य मैत्रेय के संवाद के रूप में रचा गया है। इसमें राशि, ग्रह, भाव, वर्ग-कुंडलियाँ, योग, विंशोत्तरी तथा अन्य दशा-पद्धतियाँ, और उपाय-विषयक अध्याय आते हैं। डेविड पिंग्री जैसे विद्वानों ने ध्यान दिलाया है कि प्रचलित पाठ आरंभिक टीकाकारों द्वारा उद्धृत प्राचीन पराशर से काफ़ी भिन्न है, इसलिए हम इसे एक जीवंत, विकसित होते संकलन के रूप में पढ़ते हैं।
संरचना
अध्यायों में पद्यबद्ध संवाद; मुद्रित संस्करणों में लगभग 97 से 100 अध्याय मिलते हैं (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
हिंदी टीका सहित कई संस्कृत संस्करण उपलब्ध हैं; आर. संथानम (R. Santhanam) का दो खंडों वाला अंग्रेज़ी अनुवाद व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। एक से अधिक संस्करण मिलाकर देखें, क्योंकि अध्यायों का क्रमांकन भिन्न है।
