ग्रंथ-संग्रह · होरा
Phaladīpikā
फलदीपिका
- रचयिता
- मन्त्रेश्वर
- काल
- मध्यकालीन दक्षिण भारत; प्रस्तावित तिथियाँ तेरहवीं से सोलहवीं शती तक (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- होरा
सार
फलों का व्यावहारिक ग्रंथ, 'फल का दीपक', जो ग्रहों, भावों और योगों के क्रम में व्यवस्थित है। ग्रह-बल की स्पष्ट परिभाषाओं और दशा तथा गोचर के अध्यायों के लिए इसे महत्त्व दिया जाता है। इसकी शैली वराहमिहिर की शैली से अधिक सुगम है और यह शिक्षकों में आज भी लोकप्रिय है।
संरचना
पद्य में 28 अध्याय (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री (V. Subrahmanya Sastri) का अंग्रेज़ी अनुवाद; कई संस्कृत-हिंदी संस्करण उपलब्ध हैं।
